उड़ जा पंछी दूर गगन में

ud ja panchhi door gagan mein
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उड़ जा पंछी दूर गगन में वो ही तेरा बसेरा है,
इस धरती पर और इस जग मे कोई नहीं अब तेरा है।
आसमा तुझे हाथ फैला कर पल भर में अपना लेगा,
धरती पर ये मानव क्या क्या तुझसे करवा लेगा!
रुकियो मत, थकियो मत, डरियो मत उड़ता जइयो,
कोई ठिकाना ये आसमा आखिर तुझको बतला देेेगा

हर पंछी को एक़ ना एक़ दिन अकेला उड़ना पड़ता है,

दुनिया में शायद ही कोई किसी का साथ दे सकता है।
तुझे जो भगवान ने पंखो का दिया है वरदान,
कर उसका इस्तेमाल और बढ़ा तू अपनी शान।
अपनी किस्मत पर तू शायद इतरा सकता है,
पर याद रख हर पथ पर धोखा तू खा सकता है।
आसमा मे भी ये इंसान घात लगाए बैठा है,
तेरी इस छोटी सी जान पर आँख गढ़ाए बैठ है।
एक से दुसरे,दुसरे से तीसरे देश उड़के तू जायो,
पर भूल कर भी नीचे उतर कर मत आइयो।
पता है मुझे तुझे भूख तृष्णा सताएगी,
तब तुझे इस धरती की याद जरूर आएगी।
नीचे आने के नाम पर तू घबराएगा,
पर रात के अँधेरे मे नीचे जरूर आएगा।
पर बात से तेरा भोला मन अंजान है,
निशाचर के रूप में भी मानव नीचे विद्यमान है।
तू नीचे आ कर धोका खाएगा,
फिर आसमा के आग़ोश में जा नहीं पाएगा,
तब ये आसमा तुझ पर अपने आँसू बहाएगा….!!

– धीरज सिंह

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