तुम मेरे लिखने का हिसाब न लो…

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तुम,
मेरे लिखने का हिसाब न लो,
जब तुम्हे देखूंगा, लिखूंगा,
जब तुम्हे सोचूंगा, लिखूंगा…।

जब तुम्हारी नजर से,
मेरी नजर मिल जाएगी,
जब तुम्हारे चेहरे पर,
मेरी निगाह ठहर जाएगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

मैं लिखूंगा तुम्हारी प्यारी बातें,
मैं लिखूंगा अपनी सुनहरी मुलाकाते,
जब इंद्रधनुष के रंगों सी,
तुम्हारी मुस्कुराहट जहाँ में बिखरेगी,
जब कभी मेरे आहट से,
तेरे चेहरे की लाली निखरेगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

जब आंख खुलते तुम्हारा चेहरा,
दिन मेरा खुशनुमा बनाएगी,
जब तुम्हारी मीठी बातों से,
दिन की थकान मिट जाएगी,
मैं लिखूंगा वो सारी बातें,
तन्हा कैसी थी तुम बिन रातें,
जब कभी मुझे नींद नहीं आएगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

जब हाथों में तेरा हाथ होगा,
न बिछड़े ऐसा साथ होगा,
जब सिमटकर दुनीयाँ मेरी,
तुझ तक ही राह जाएगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

जब तुम मुझसे किसी बात पर,
रूठकर मुझसे कतराओगी,
मेरे लाख मनाने पर भी,
दूर मुझसे चली जाओगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

जब तुम मुझसे मिल जाओगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।
जब तुम मुझसे खो जाओगी,
तो मैं तुम्हे लिखूंगा।

तुम,
मेरे लिखने का हिसाब न लो,
जब तुम्हे देखूँगा, लिखूंगा,
जब तुम्हे सोचूंगा, लिखूंगा…।?

… With love अक्स

 

Ashish Kumar Sinha
About अक्स की कलम से 16 Articles

Love to write…
Love to express feelings with word…

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