दोस्ती

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दोस्ती भगवान का दिया हुआ वो तोहफा है जो नसीब वालों को मिलता है। ऐसे ही कहीं दोस्त मेरे हैं, उन जैसा कोई नहीं।  वो तो एक अनमोल रत्न है मेरे लिए। कभी लड़ना, कभी मनाना, बस इन सबके बीच एक अटूट रिश्ता बन गया हमारी दोस्ती का। बस पल भर में ज़िन्दगी बन जाते हैं दोस्त। फिर उनसे कभी बिछड़ने की चाह नहीं होती। खुदा भी हमारी दोस्ती की गवाही देता है। सारा जमाना देखता है हमारी दोस्ती।

यूँ तो हम सभी चल देते हैं अपनी अपनी राह पर, पर क्या करें? दोस्त भी ऐसे मिल जाते हैं जिनसे बिछड़ने का मन ही नही होता। जिन्हें छोड़ कर जाने का दिल ही नहीं करता।

दूर से जब वो आवाज सुनाई देती तो बस मन उस ओर खींचा चला जाता। मन कहता ये लो आ गए तुम्हारे दोस्त, दिल कहता shssss…

वो दोस्त नहीं ज़िन्दगी हैं हमारी। साथ देते थे एक दूसरे का, चाहे सही हो या गलत। जब भी कोई बोलता ये मत कर तो हम मस्ती में वही किया करते।

वक़्त गुजर, दिन, महीने, साल गुजरे। आज भी दोस्ती वही है बस सबके राह अलग हो गए। फिक्र वही है बस सबके देखने का नजरिया बदल गया। मिलते झगड़ते भी हैं बस अब कोई नाराज नहीं होता। आज भी उसी नाम से बुलाते हैं एक दूसरे को पर न जाने कहाँ वो पहले वाली पुकार कहीं गुम हो गयी है।

उम्र भर साथ रहें ये वादा भी तो नहीं किया था। बस एक भड़ोसा किया था…

बस उसी भड़ोसे पर कायम है ये “दोस्ती”

मेरे खुदा बस है एक ही दुआ

रहे सलामत हमारी दोस्ती सदा…

…….दीया

 

 

Dia
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