रात

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पता है तुम्हें ?
एक बहुत खूबसूरत तोहफा दे कर गयी हो तुम मुझे। तुम्हारे आने से पहले अनजान था मै कि रात क्या होती है, सोचता था कि सिर्फ सोने के लिए बनायीं गयी है। फिर तुम्हारे आने पर उन्हीं रातों में चाँद से मिला, सितारों से दोस्ती हुयी, और आसमान हमको खेलने का आँगन लगने लगा। तमाम बातों में कैसे रात कट जाती थी पता ही नही चलता था।
फिर तुम्हारे जाने के बाद ये एहसास हुआ कि एक रात सदियों जितनी लंबी भी हो सकती है और तब तक इन रातों से प्यार भी हो चूका था। कितना सुकून है इनमें ! कोई दखल भी नहीं दे पाता, जब ख्याल तुममे उलझते हैं। जब तुम्हारी यादें हमसे आँख मिचौली खेलती है तो कोई नही होता खेल को रोकने टोकने वाला। हँसना चाहूं तो हंस लेता हूँ और रोना चाहूं तो रो लेता हूँ। न तो अपनी डायरी छिपाने की जुरूरत पड़ती रात में और न ही तुम्हारी तस्वीर। ठंडी हवा तुम्हारी साँसों की तरह मेरे होंठों पर बिखरती है। इतना सुकून इतना चैन ! ये दिन मुझे कभी नही दे पाये। अगर काम धंधे की फिकर न हो तो इन प्यारी रातों को कभी सोने में जाया न करूँ। बेहिसाब बातें तुम्हारे अक्स से, बेहिसाब ताऱीफें तुम्हारे हुस्न की, इन रातों ने ही तुमको हमारा खुदा और हमको इक नमाज़ी बना दिया। और जब इन रातों में मिल जाएं बरसातें फिर तो ऐसा मालूम होता है जैसे तुम बारिश और हम मयूर। तमाम मधुर गीत जुबां पे उतर आते हैं। तुम्हारा ज़िक्र हर फ़िक्र को धुआं धुँआ करके उढ़ा देता है। बरसात की सोंधी महक में तुम्हारी यादों की महक मिल के गज़ब ढा देती है।
एक अधूरे सपने की कसक मगर कभी कभी सारे सन्नाटों को चीरकर जो शोर मचाती हैं कि सारा चैन सुकून धरा का धरा रह जाता है। हां वही सपना जो तुम्हे फोन पे सुनाया था, कि इस आधी रात में तुम्हारा हाथ थामकर चुपचाप से तुम्हे छत पर ले आऊँगा और फिर जब तुमको आसमान में देखने को कहूँगा तो चाँद भी जल जाएगा मेरी किस्मत को देखकर और चांदनी भी शर्मसार हो जाएगी तुम्हारे नूर को देखकर। फिर तुमको अपने सारे दोस्त सितारों से मिलाऊंगा। वो खुश होकर टिमटिमाएंगे। मैं तुम्हारे काँधे पे सिर टिकाये उस रात को वहीँ रोकने के सारे जतन कर दूंगा। तुम्हारे चेहरे से छनती चांदनी अपनी आँखों में समेट लूँगा। मैं उस पूरी रात अपनी पलकों को झपकने की इज़ाज़त तक न दूंगा।
आह ये ख्वाब था पर मै हर रात जीता हूँ इस ख्वाब को.. तुम नहीं पर तुम्हारी यादें .. तुम्हारे ख्याल.. तुम्हारी कही बातें.. तुम्हारा अक्स कितने सारे साथी तो हैं मेरे पास..
~तुम्हारी मोहब्बत और नफरत का बराबर का भागीदार !!
तुम्हारा
***

~अजय झा

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